विक्रम सैंधव. अंक 5. दृश्य 2. सोमक्षेत्र. युद्ध

In Adaptation, Culture, Drama, Fiction, Poetry by Arvind KumarLeave a Comment

 

बस, एक हल्‍ला और!

फिर अपनी विजय है.

सोमक्षेत्र. युद्ध.

(तूर्यनाद. शतमन्‍यु और शूरसेन.)

शतमन्‍यु

शूरसेन, लो, आदेश लो. जल्‍दी करो.

उस ओर सेना से कहोउखड़ गए

भरत के पाँव. आओ यहाँ तत्‍काल.

बस, एक हल्‍ला और! फिर अपनी विजय

है. जल्‍दी करो. तत्‍काल जाओ

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